Sunday, 7 September 2014

गर्भपात : मनुष्य की पशुता का विभत्स उदहारण

जब भी आप किसी मनुष्य रुपी पशु को गर्भपात की योजना बनाते देखें/सुने
तो उसे ये ह्रदय विदारक घटना अवश्य बताएं । शायद उसकी मरी हुई मनुष्यता जीवित हो जाये ।
कृपया इस सन्देश को अवश्य पढ़े और
अगर इसे पढ़ कर आपके
दिल की धड़कने बढ़ जाये तो ये सन्देश दूसरों तक भी पहुचाएँ
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गर्भस्थ बच्ची की हत्या का आँखोँ देखा विवरण
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अमेरिका मेँ सन 1984 मेँ एक
सम्मेलन हुआ था
'नेशनल राइट्स टू लाईफ कन्वैन्शन' ।
(National Right to Life Convention)

इस सम्मेलन के एक प्रतिनिधि ने
डॉ॰ बर्नार्ड नेथेनसन के द्वारा गर्भपात की बनायी गयी एक
अल्ट्रासाउण्ड फिल्म SILENT SCREAM (गूँगी चीख )
का जो विवरण दिया था, वह इस
प्रकार है-
' गर्भ की वह मासूम बच्ची अभी दस सप्ताह की थी और काफी चुस्त थी ।

हम उसे अपनी माँ की कोख मेँ खेलते,
करवट बदलते वअंगूठा चूसते हुए देख
रहे थे ।
उसके दिल की धड़कनोँ को भी हम
देख पा रहे थे और वह उस समय 120 की साधारण गति से धड़क रहा था ।
सब कुछ बिलकुल सामान्य था;
किँतु जैसे ही पहले औजार (suction pump) ने गर्भाशय की दीवार
को छुआ, वह मासूम बच्ची डर से
एकदम घूमकर सिकुड़ गयी और उसके दिल की धड़कन काफी बढ़
गयी ।
हलाँकिअभी तक किसी औजार ने
बच्ची को छुआ तकभी नहीँ था,
लेकिन उसे अनुभव
हो गया था कि कोई चीज उसके आरामगाह, उसके सुरक्षित क्षेत्र
पर हमला करने का प्रयत्न कर रही है

हम दहशत से भरे यह देख रहे थे
कि किस तरह वह औजार उस
नन्हीँ- मुन्नी मासुम गुड़िया- सी बच्ची के टुकड़े-टुकड़े कर रहा था ।
पहले कमर, फिर पैर आदि के टुकड़े
ऐसे काटे जा रहे थे जैसे वह जीवित
प्राणी न होकर कोई गाजर-
मूली हो और वह बच्ची दर्द से
छटपटाती हुई, सिकुड़कर घूम-घूमकर तड़पती हुई इस हत्यारे औजार से
बचने का प्रयत्न कर रही थी ।
वह इस बुरी तरह डर
गयी थी कि एक समय उसके दिल
की धड़कन200 तक पहुँच गयी ! मैँने
स्वयं अपनी आँखोँ से उसको अपना सिर पीछे झटकते व
मुँह खोलकर चीखने का प्रयत्न करते
हुए देखा, जिसे डॉ॰ नेथेनसन ने
उचित ही 'गूँगी चीख' या 'मूक
पुकार' कहा है ।
अंत मेँ हमने वह नृशंस वीभत्स दृश्य भी देखा, जब
सँडसी/rod उसकी खोपड़ी को तोड़ने के
लिए तलाश रही थी और फिर
दबाकर उस कठोर खोपड़ी को तोड़
रही थी; क्योँकि सिर का वह भाग
बगैर तोड़े सक्शन ट्यूब के माध्यम से बाहर नहीँ निकाला जा सकता था ।'
हत्या के इस वीभत्स
खेल को सम्पन्न करने मेँ करीब
पन्द्रह मिनट का समय लगा और
इसके दर्दनाक दृश्य का अनुमान इससे
अधिक और कैसे लगाया जा सकता है कि जिस डॉक्टर ने यह गर्भपात
किया था और जिसने मात्र
कौतूहलवश (due to curiosity) इसकी फिल्म
बनवा ली थी, उसने जब स्वयं इस
फिल्म को देखा तो वह
अपना क्लीनिक छोड़कर चला गया और फिर वापस
नहीँ आया ! —
आपका एक share किसी मासूम को टुकड़े-टुकड़े होने से बचा सकता है!
और शायद किसी जानवर को इन्सान बना सकता है

The mind of men and women

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